सोमवार, 31 दिसंबर 2018

Happy new year 2019

भीम वार्ता टीम की ओर से सभी मूलनिवासी साथियों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं कामना करते हैं कि आप सभी एकजुट होकर समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करेंगे जय भीम जय भारत


शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

हाॅर्न धीरे बजाओ मेरा बहुजन समाज सो रहा है

एक ट्रक के पीछे लिखी ये पंक्ति झकझोर गई...!!

"हाॅर्न धीरे बजाओ मेरा बहुजन समाज  सो रहा है "...!!!
Bhimvarta

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उस पर एक कविता इस प्रकार है कि.....
'ब्राहम्णो के जुल्म सितम से...
फूट फूटकर 'रोया' है...!!
'धीरे' हाॅर्न बजा रे पगले....
बहुजन समाज सोया है...!!
भीम जी जाने के बाद चैन' मिला है...
'पूरी' नींद से सोने दे...!!
जगह मिले वहाँ 'साइड' ले ले...
हो शोषण  तो होने दे...!!
किसे जगाने की चिंता में...
तू इतना जो 'खोया' है...!!
'धीरे' हाॅर्न बजा रे पगले ...हमारा बहुजन  समाज  सोया है....!!!
आरक्षण के सब 'नियम' पड़े हैं...
कब से 'बंद' किताबों में...!!
'जिम्मेदार' समाज वाले...
सारे लगे गुलामी में...!!
तू भी कर दे  झूटे वादे
क्यों 'ईमान' में खोया है..??
धीरे हाॅर्न बजा रे पगले...
'बहुजन सोया है...!!!
गुलामी की इन सड़कों पर...
सभी क़दम मिला चलते हैं...!!
आवाज़ उठाने वाले मर के चलते बनते हैं
मेरे समाज  की लचर विधि से...
'भला'मनुवादी का होया है...!!
धीरे हाॅर्न बजा रे पगले....
'बहुजन समाज सोया है....!!!
मेरा समाज है 'सिंह' सरीखा...
सोये तब तक सोने दे...!!
'गुलामी की इन सड़कों पर...
नित शोषण ' होने दे...!!
समाज  जगाने की हठ में तू....
क्यूँ दुख में रोया है...!!
धीरे हाॅर्न बजा रे पगले..
बहुजन समाज सोया है....!!!
अगर समाज  यह 'जाग' गया तो..ब्राम्हण  'सीधा' हो जाएगा....!!
आर.एस एस.वाले 'चुप' हो जाएँगे....
और मनुवादी  रो जायेगा...!!
अज्ञानता से 'शर्मसार' हो ....
बाबा भीम  भी रोया है..!!
धीरे हाॅर्न बजा रे पगले...
बहुजन समाज सोया है...!!!
समाज  हमारा सोया है....!!!
जय भीम जय संविधान

मंगलवार, 26 जून 2018

Kaala movie

काला.….

कल समय मिला तो 'काला ' फिल्म देखने का विचार आया
घोर आश्चर्य हुआ की एकाएक यह फिल्म सिर्फ एक हफ्ते में  दिल्ली के सिनेमाघरो से गायब कैसे हो गई? जबकि इस फ़िल्म की कमाई 100 करोड़ से अधिक है।

फिर इसके पटकथा का ध्यान आया जो मिडिया ने इसको रेटिंग दी है । मुख्य मिडिया के हिसाब से इसकी पटकथा दलित अस्मिता के हिसाब के लिखी गई है अतः रेटिंग 1.5 दी है।
Image@bahujantv

आप में से बहुतों ने फिल्म देख ली होगी , कहानी सबको पता ही होगी , रिव्यू या आलोचना पद्व ही ली होगी? किन्तु मैंने फिल्म अभी देखी है अतः इसपर लिखने से अपने आप को रोक नहीं पाया।

बहुत खोजने के बाद उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे लोनी बॉर्डर के पुराने और सिंगल पर्दे वाले सिनेमाघर में यह फिल्म लगी हुई मिली।

अब इस फिल्म की कहानी के पात्रों के नाम देखिये-

रजनीकांत का नाम काला है, काला रंग असुरों का होता है ऐसा ग्रँथ कहते हैं। फिल्म में काला शूद्र ही है। काला हमेशा काले कपड़े पहनता है।

काला के अधिकतर सीन में बैकग्राउंड में बुद्ध, अंबेडकर, लेनिन, मार्क्स की तस्वीरें दिखती है। बुद्ध विहार दिखता है।

नानापटेकर का नाम हरि अभ्यांकर है, हरि विष्णु का नाम है जो वैदिको के प्रमुख देवता है। हरि के आराध्य राम है, राम की मूर्ति उसके ऑफिस से लेके घर तक हर जगह  मिलती है।

हरि सफ़ेद कपडे पहनता है, काले रंग से उसे घृणा है। वह कहता है कि काला रंग गंदगी का होता है यंहा ध्यान देने की बात है कि ऋग्वेद में भी काले असुरों के प्रति घृणा है , उनके प्रति हिंसात्मक कार्यवाई है।

हरि की कंस्ट्रक्शन कंपनी का नाम 'मनु' है , मनु कौन थे और शूद्रो के प्रति क्या व्यवहार था यह सब जानते हैं।

काला के एक बेटे का नाम 'लेनिन' है, काला की प्रेमिका मुस्लिम है। काला ने एक देसी कुत्ता पाला हुआ है जिसका नाम भैरव होता है।

एक सीन पर लेनिन रोता है तो काला उसे डांटते हुए कहता है कि " रोता क्यों है? क्या इसी लिए मैंने तुझे एक क्रांतिकारी का नाम दिया था?"

हरि के बड़ा  नेता है, अपने पोस्टर पर लिखवाता है ' I am patriot , I will clean our country ' वह धारवी को 'डिजिटल ' बनाने का नारा देता है।

आप  मौजूदा एक बड़े नेता के कथन से इसे जोड़ के देखिये जो ' देशभक्त' होने का सर्टिफिकेट बांटता है, और 'स्वच्छ भारत ' नारा दे के चुनाव जीत गया है, वह ' डिजिटल भारत ' के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था का क्या हाल कर दिया है यह आप जानते हैं।

काला के बेटे लेनिन की गर्लफ्रेंड जो की एक विरोधी और क्रांतिकारी प्रवृति की है , एक सीन में एक सेकेंड के लिए अपने छोटे से घर की लाइट जलाती है तो अम्बेडकर की तस्वीर दिखती है।

हरि अपने को राम समझता है और काला को रावण।

हरी  ' स्वच्छता अभियान ' की आड़ में अपनी ' मनु' कंपनी के जरिये धारवी जो की काला की बस्ती है, जंहा छोटी जाति /मुस्लिम आदि  गरीब लोग रहते है  जिन्होंने धारवी को अपनी मेहनत से खड़ा किया है, उस पर कब्ज़ा कर उसे तुड़वाके अमीरो के लिए बिल्डिंग्स और गोल्फ कोर्स बनवाना चाहता है।

वह धारवी के लोगो को उनकी जमीनों की एवज में छोटे छोटे कमरे देना चाहता है,काम धंधे के लिए अमीरो के घर नौकर बनने को कहता है।

धारवी प्रतीकात्मक रूप है भारत मूल लोगो की  जमीन का और मनु कंपनी प्रतीकात्मक रूप है उस पर कब्ज़ा करने वालो का और मूल लोगो को गुलाम बनाने का ।

काला एक सीन में अम्बेडकर का डायलॉग बोलता है' मैं अपने लोगो के अधिकारों के लिए स्वार्थी हूँ'

हरि पैर छूने की संस्कृति को उच्च मानता है जबकि काला हाथ मिलाने की। काला के अनुसार हाथ मिलाने से समानता की भावना आती है जबकि पैर छूने से दासता की।

हरि जब काला से हारने लगता है तो धारवी में 'हिन्दू मुस्लिम' दंगे करने की फ़िराक में रहता है, एक मस्जिद में सूअर का मॉस फिंकवा देता है। चुनाव जींतने के लिए हिन्दू मुस्लिम दंगे की ट्रिक किसकी है यह आप जानते हैं।

काला हरि के विरोध में धारवी के लोगो से अमीरों के घर काम बंद करने को कहता है ,और असहयोग आंदोलन चलवा देता है।

मिडिया उस आंदोलन की जम बुराई करती है यंहा तक की शान्ति पूर्ण आंदोलन को आतंकी आंदोलन बता देती है, यह सीन  मौजूदा मिडिया के रवैये को हूब हु दर्शाता है जो  दलितों के अधिकतर आंदोलन को आतंकी आंदोलन बता देती है। गोदी मिडिया जो काम करती है वैसी ही।

एक सीन बंद के दौरान लोगो को संबोधित करते हुए एक पुलिसवाला ' जय भीम'  के नारे लगा देता है।

काला एक डायलॉग बोलता है' अगर अपने अतीत की जड़े नहीं पहचानोगे तो भविष्य में खड़े कैसे रह पाओगे? "

हरि काला को मरवाने के लिए रामायण का पाठ अपने घर रखवाता है। काला मारा जाता है, किन्तु बस्ती के सभी लोग काला बन जाते हैं।

अंत में हरि के सफ़ेद कपड़ो पर पहले काला रंग गिरता है , फिर लाल और फिर नीला। ये तीनो रंग का अर्थ आप जानते हैं , काला दक्षिण का , लाल कम्युनिस्ट का और नीला अम्बेडकर का। हरि की सफ़ेद कमीज तीनो रंगों से सराबोर हो जाती है और वह मारा जाता है।

शूद्र/ दलित अस्मिता को लेके बनी ऐसी फिल्म मैंने आज तक बड़े पर्दे पर नहीं देखी , जंहा विरोध है शोषण के प्रति। जंहा खुल के बुद्ध है, अम्बेडकर हैं, लेनिन है, मार्क्स हैं ..... जय भीम है।

आश्चर्य है कि इस फिल्म पर बैन क्यों नहीं लगा अभी तक? शायद रजनीकांत और पा. रंजीथ फिल्म है इसलिए ऐसा नहीं हो पाया। किन्तु धूर्तता से इसे सिनेमाघरो से एक ही हफ्ते में उतार लिया गया।

सैल्यूट पा. रंजीथ , जो की स्वयं एक दलित है अतः ऐसी हिम्मत कर पाएं ।

फिल्म का हर दृश्य, बैकग्राउंड दृश्य, डायलॉग अपने आप में एक संदेश देता है, गूण रहस्य लिए हुए है, 'स्वच्छता अभियान' और 'डिजिटल इंडिया'' के नारे की आड़ में क्या होता है यह बखूबी दिखाया है।

यह फिल्म दो मुद्दों पर एक साथ प्रहार करती है, पहला ' स्वच्छ भारत' और ' डिजिटल इंडिया' की हकीकत तथा दूसरा भारत के मूल लोगो की जमीनों को कैसे हड़प के उन्हें गुलाम बनाया गया।

सभी कलाकरों के अभिनय जबरजस्त है, नानापटेकर ने  हरि अभ्यंकर के रोल में बहुत जानदार  ऐक्टिंग की है, रजनीकांत की तो खैर बात ही अलग है।

आप इस फिल्म को देखिये जरूर...मेरी तरफ से रेटिंग 4.5

साभार — संजय जी , Go Atheist व्हाट्सएप ग्रुप से 

मंगलवार, 12 जून 2018

कविता - ये दलितों की बस्ती हैं

बोतल महँगी है तो क्या हुआ,
थैली खूब सस्ती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

यहाँ जन्मते हर बालक को, पकड़ा देते हैं झाडू।
वो बेटा, अबे, साले,
परे हट, कहते हैं लालू कालू

गोविंदा और मिथुन बन कर,
खोल रहे हैं नाली।
दूजा काम इन्हें ना भाता इसी काम में मस्ती है।।
ये दलितो की बस्ती है ।

सूअर घूमते घर आंगन में,
झबरा कुत्ता घर द्वारे
वह भी पीता वह भी पीती,
पीकर डमरू बाजे
भूत उतारें रातभर,
बस रात ऐसे ही कटती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

ब्रह्मा विष्णु इनके घर में,
कदम कदम पर जय श्रीराम।
रात जगाते शेरोंवाली की......
करते कथा सत्यनाराण..।।
पुरखों को जिसने मारा
उसकी ही कैसिट बजती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

यहाँ बरात मैं बलि चढ़ाते,
मुर्गा घेंटा और बकरा
बेटी का जब नेग करें,
तो माल पकाते देग भरा
जो जितने ज्यादा देग बनाये
उसकी उतनी हस्ती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

तू चूहड़ा और मैं चमार हूँ,
ये खटीक और वो कोली।
एक तो हम कभी बन ना पाये,
बन गई जगह जगह टोली।।
अपना मुक्तिदाता को भूले,
गैरों की झांकी सजती है।
ये दलितो की बस्ती है ।।

हर महीने वृंदावन दौड़े,
माता वैष्णो छ: छ: बार।
गुडगाँवा की जात लगाता, सोमनाथ को अब तैयार।।
बेटी इसकी चार साल से,
दसवीं में ही पढ़ती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

बेटा बजरंगी दल में है,
बाप बना भगवा धारी भैया हिन्दू
परिषद में है, बीजेपी में महतारी।
मंदिर मस्जिद में गोली,
इनके कंधे चलती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

आर्य समाजी इसी बस्ती में,
वेदों का प्रचार करें
लाल चुनरिया ओढ़े,
पंथी वर्णभेद पर बात करें
चुप्पी साधे वर्णभेद पर,
आधी सदी गुजरती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

शुक्रवार को चौंसर बढ़ती,
सोमवार को मुख लहरी।
विलियम पीती मंगलवार को,
शनिवार को नित जह़री।।
नौ दुर्गे में इसी बस्ती में,
घर घर ढोलक बजती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

नकली बौद्धों की भी सुन लो,
कथनी करनी में अंतर।
बात करें बौद्ध धम्म की,
घर में पढ़ें वेद मंतर।।
बाबा साहेब  की तस्वीर लगाते,
इनकी मैया मरती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

औरों के त्यौहार मनाकर,
व्यर्थ खुशी मनाते हैं।
हत्यारों को ईश मानकर,
गीत उन्हीं के गाते है।।
चौदह अप्रैल को बाबा साहेब की जयंती,
याद ना इनको रहती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

डोरीलाल इसी बस्ती का,
कोटे से अफसर बन बैठा।
उसको इनकी क्या पड़ी अब,
वह दूजों में जा बैठा।।
बेटा पढ़ लिखकर शर्माजी,
बेटी बनी अवस्थी है।
ये दलितो की बस्ती है ।

भूल गए अपने पुरखों को,
महामही इन्हें याद नहीं।
अम्बेडकर बिरसा बुद्ध,
वीर ऊदल की याद नहीं।
झलकारी को ये क्या जानें,
इनकी वह क्या लगती है।
ये दलितो की बस्ती है ।

मैं भी लिखना सीख गया हूँ,
गीत कहानी और कविता।
इनके दु:ख दर्द की बातें, मैं
भी भला कहाँ लिखता था।।
कैसे समझाऊँ अपने लोगों को मैं,
चिंता यही खटकती ये दलितों की बस्ती है।।

जय भीम
जय भारत
@अज्ञात 

रविवार, 10 जून 2018

अनमोल वचन #bhimrao ambedkar

Anmol vachan dr bhimrao ambedkar
"मेरे नाम की जय-जयकार करने से अच्‍छा है, मेरे बताए हुए रास्‍ते पर चलें।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"रात रातभर मैं इसलिये जागता हूँ क्‍योंकि मेरा समाज सो रहा है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, वह कौम कभी भी इतिहास नहीं बना सकती।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"मैं राजनीति में सुख भोगने नहीं बल्कि अपने सभी दबे-कुचले भाईयों को उनके अधिकार दिलाने आया हूँ।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"मनुवाद को जड़ से समाप्‍त करना मेरे जीवन का प्रथम लक्षय है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"जो धर्म जन्‍म से एक को श्रेष्‍ठ और दूसरे को नीच बनाए रखे, वह धर्म नहीं, गुलाम बनाए रखने का षड़यंत्र है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"राष्‍ट्रवाद तभी औचित्‍य ग्रहण कर सकता है, जब लोगों के बीच जाति, नरल या रंग का अन्‍तर भुलाकर उसमें सामाजिक भ्रातृत्‍व को सर्वोच्‍च स्‍थान दिया जाये।"
   *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"मैं तो जीवन भर कार्य कर चुका हूँ अब इसके लिए नौजवान आगे आए।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"अच्छा दिखने के लिए मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ!"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"जो झुक सकता है वह सारी दुनिया को झुका भी सकता है!"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"लोकतंत्र सरकार का महज एक रूप नहीं है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"एक इतिहासकार, सटीक, ईमानदार और निष्‍पक्ष होना चाहिए।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"संविधान, यह एक मात्र वकीलों का दस्‍तावेज नहीं। यह जीवन का एक माध्‍यम है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"किसी का भी स्‍वाद बदला जा सकता है लेकिन जहर को अमृत में परिवर्तित नही किया जा सकता।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"न्‍याय हमेशा समानता के विचार को पैदा करता है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"मन की स्‍वतंत्रता ही वास्‍तविक स्‍वतंत्रता है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"इस दुनिया में महान प्रयासों से प्राप्‍त किया गया को छोडकर और कुछ भी बहुमूल्‍य नहीं है।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"ज्ञान व्‍‍यक्ति के जीवन का आधार हैं।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

"शिक्षा जितनी पुरूषों के लिए आवशयक है उतनी ही महिलाओं के लिए।"
  *डॉ. भीम राव अम्बेडकर*

    " जय भीम - जय भारत "जय संविधान

बुधवार, 6 जून 2018

Dalit Calandring

दलित कैलेंडर तथा  दलित महापुरुषों की जयंतियां पुण्यतिथि आदि की जानकारी

जनवरी

1 जनवरी 1818 भीमा कोरेगांव की लड़ाई
1 जनवरी 1848 फुले दंपति ने लड़कियों के लिए भारत का पहला स्कूल पुणे में खोला
3 जनवरी 1831 सावित्री बाई फुले जयंती (सर्वशिक्षा दिवस)
12 जनवरी 1972 चंद्रिका प्रसाद जिज्ञासु परिनिर्वाण दिवस (जिज्ञासु का जन्म वर्ष 1885 में हुआ, तिथि ज्ञात नहीं)
13 जनवरी 1874 तिलका मांझी शहादत दिवस
24 जनवरी 1924 कर्पूरी ठाकुर जयंती
26 जनवरी 1950 भारत का संविधान लागू हुआ

फरवरी

2 फरवरी 1922 जगदेव प्रसाद जयंती
2 फरवरी 1949 मोतीरावण कंगाली जयंती
7 फरवरी 1993 ललई सिंह यादव परिनिर्वाण दिवस
11 फरवरी 1750 तिलका मांझी जयंतीमाघ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा
(विक्रम संवत के अनुसार) रैदास जयंती
(रैदास जयंती विक्रम संवत के अनुसार मनाई जाती है। यह दिन अंग्रेजी कैलेण्डर में प्रायः जनवरी या फरवरी माह में आता है। हर वर्ष इसकी तारीख अलग-अलग होती है।)
23 फरवरी 1873 गाडगे जयंती

मार्च

10 मार्च 1997 सावित्रीबाई फुले परिनिर्वाण दिवस
15 मार्च 1934 कांशी राम जयंती
23 मार्च 1931 भगत सिंह शहीद दिवस
23 मार्च 1910 राम मनोहर लोहिया जयंती

 अप्रैल

4 अप्रैल 1890 झलकारीबाई शहादत दिवस
5 अप्रैल 1908 जगजीवन राम जयंती
11 अप्रैल 1827 जोतीराव फुलेे जयंती
11 अप्रैल 1943 लाल सिंह दिल जयंती
14 अप्रैल 1891आंबेडकर जयंती

चैत शुक्ल अष्टमी
 (विक्रम संवत के अनुसार)अशोक जयंती
(अशोक जयंती विक्रम संवत के अनुसार मनाई जाती है। यह दिन अंग्रेजी कैलेण्डर में प्रायः अप्रैल माह में आता है। हर वर्ष इसकी तारीख अलग-अलग होती है।)
वैशाख शुक्ल तृतीय
(विक्रम संवत के अनुसार)बसव जयंती
(बसव जयंती विक्रम संवत के अनुसार मनाई जाती है। यह दिन अंग्रेजी कैलेण्डर में प्रायः अप्रैल या मई माह में आता है। हर वर्ष इसकी तारीख अलग-अलग होती है।)

मई

1 मईअंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस
6 मई 1922 शाहूजी महाराज परिनिर्वाण दिवस
6 मई 1879 अछूतानंद जयंती
11 मई 1952 बोधानंद परिनिर्वाण दिवस

जून

1 जून 1873 जोतिबा फुले की किताब गुलामगिरी प्रकाशित
9 जून 1900 बिरसा मुंडा शहादत दिवस
18 जून 1941अयंकलि परिनिर्वाण दिवस
जेठ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा
(विक्रम संवत के अनुसार)कबीर जयंती
(कबीर जयंती विक्रम संवत के अनुसार मनाई जाती है. यह दिन अंग्रेजी कैलेण्डर में प्रायः जून माह में आता है. हर वर्ष इसकी तारीख अलग-अलग होती है)
26 जून 1874 शाहूजी महाराज जयंती
30 जून 1855 हुल दिवस (सिद्धू-कान्हू शहादत दिवस)

जुलाई

10 जुलाई 1971भिखारी ठाकुर परिनिर्वाण दिवस
22 जुलाई 1933अछूतानंद परिनिर्वाण दिवस
26 जुलाई 1902 आरक्षण दिवस

अगस्त

7 अगस्त 1990 मंडल दिवस (ओबीसी आरक्षण के लागू करने की घोषणा)
9 अगस्तविश्व आदिवासी दिवस (संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1994 में घोषित किया कि हर वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाएगा।)
14 अगस्त 2007 लाल सिंह दिल परिनिर्वाण दिवस
15 अगस्त 1947 स्वतंत्रता दिवस
20 अगस्त 1856 नारायण गुरु जयंती
22 अगस्त 1923 रामस्वरूप वर्मा जयंती
28 अगस्त 1863 अयंकलि जयंती

सितम्बर

1 सितम्बर 1911 ललई सिंह यादव जयंती
11 सितम्बर 1957 थियाकी इमेन्यूल सीकरन परिनिर्वाण दिवस
17 सितम्बर 1879 ईवी रामास्वामी पेरियार जयंती
20 सितम्बर 1928 नारायण गुरु परिनिर्वाण दिवस
24 सितम्बर 1873 सत्यशोधक समाज स्थापना दिवस
27 सितम्बर 1907 भगत सिंह जयंती

अक्टूबर

9 अक्टूबर 2006 कांशीराम का निधन
9 अक्टूबर 1924 थियाकी इमेन्युल सीकरन जयंती
14 अक्टूबर 1956 डॉ आंबेडकर का धर्मान्तरण  दिवस (धम चक्र प्रवर्तन दिवस)
15 अक्टूबर 1934 पहली बार देवदासी प्रथा विरोधी बिल पास हुआ (बाम्बे विधान परिषद)अश्विन शुक्ल शरद पूर्णिमा
(विक्रम संवत के अनुसार)महिषासुर शहादत दिवस
(महिषासुर शहादत दिवस विक्रम संवत के अनुसार मनाई जाती है। यह दिन अंग्रेजी कैलेण्डर में प्रायः अक्टूबर माह में आता है। हर वर्ष इसकी तारीख अलग-अलग होती है।)
30 अक्टूबर 2015 मोतीरावण कंगाली परिनिर्वाण दिवस

नवम्बर

15 नवंबर 1875 बिरसा मुंडा जयंती
20 नवंबर 1923 आरएल चंदापुरी जयंती
22 नवंबर 1830 झलकारीबाई जयंती
26 नवंबर 1949 भारतीय संविधान का प्रारूप डा. आबेडकर ने पेश किया
28 नवंबर 1890 जोतिबा फुले परिनिर्वाण दिवस

दिसम्बर

4 दिसंबर 1889 टंट्या भील शहीद दिवस
6 दिसंबर 1956 आंबेडकर परिनिर्वाण दिवस
18 दिसंबर 1756 घासीदास जयंती
18 दिसंबर 1887 भिखारी ठाकुर जयंती
20 दिसंबर 1858 गोविंद गुरु जयंती
20 दिसंबर 1956 गाडगे परिनिर्वाण दिवस
21 दिसम्बर 1982 अनूपलाल मंडल परिनिर्वाण दिवस
24 दिसंबर 1973 पेरियार परिनिर्वाण दिवस
25 दिसंबर 1927 मनुस्मृति दहन दिवस

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सोमवार, 4 जून 2018

आबूरोड में जिग्नेश मेवाणी जी का भव्य स्वागत

आबूरोड | गुजरात में विधायक जिग्नेश मेवाणी जी के आबूरोड आगमन पर डॉ. अंबेडकर सेवा समिति और भीम सेना तथा भीमआर्मी ने मानपुर चौराहे पर साफा व माला पहना कर स्वागत किया।





 इस मौके मेवानी ने कहा कि हम सभी बहुजनों को एकजुट होकर मनुवादी ताकतों को परास्त करना होगा। अंबेडकर सेवा समिति के विधानसभा प्रभारी गणपत मेघवाल, अंबेडकर सेवा समिति के तहसील अध्यक्ष राजेंद्र परमार, डॉ. राम मीणा,  अंबेडकर सेवा समिति तहसील अध्यक्ष पिंडवाड़ा मांगीलाल परिहार, प्रवीण चौहान ने भी विचार व्यक्त किए। मंच का संचालन कैलाश डांगी ने किया।
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कार्यक्रम में अंबेडकर सेवा समिति के तोलाराम मेघवाल, दिनेश परमार, प्रेम मिरल, भुपेन्द्र कुमार, गणपत अहम्पा, भागीरथ, पूर्व पार्षद नवीन सांखला, माधव मारू,विष्णु ,अमराराम मेघवाल आदि मौजूद थे। 

सोमवार, 21 मई 2018

वाह भाई वाह...... एक भीमपुत्र कवि की रचना

वाह भाई वाह
काबिले तारीफ हैं
 हम ओर हमारी
अपनी बेशर्मी  ओर कृतघ्नता
अपने आरक्षण के बलिदानियों के प्रति
बस मौज भाई मौज
ओर भी मौज
अरे आंख बंद कर भी  मौज
अनजान ही रहना है
चाहे
कितनी भी करते जाए
सोरी
करते नही  रचते जाए
भीम के बंदों के अपमान
नही शर्मिन्दगी की जुठी मुठी कहानी
पर भीम के कृतघ्न हम मौज ही मौज
बस जय जय जय पुण्य पाप की
सेवा और समाज की
बस चुपचाप देखकर
सोचना
कोई सवाल मत करना
बाकी सब आपकी सोच और संस्कार
की व्यवहारिक होगी कहानी
कितने लापरवाह-------------?

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

बलात्कार व अत्याचार के खिलाफ कैंडल मार्च17अप्रैल को

आबूरोड़- सभी साथियों को सूचित किया जाता है कि देश में अपनी बहन & बेटीयो  के साथ बढ़ रहे बलात्कार व अत्याचार के खिलाफ दिनांक 17अप्रैल
2018 को शाम 5 बजे रेलवे स्टेशन , आबुरोड में कैंडल मार्च का आयोजन किया जाएगा तो आप सभी भाई -बंधुओ से निवेदन है कि आप समय पर पधारकर कैंडल मार्च आयोजन को सफल बनावें ।
निवेदक - भीम आर्मी , आबुरोड ।
सम्पर्क सूत्र - 9783518060,
9672944772,
9694989529,
9057218584

शनिवार, 7 अप्रैल 2018

प्रतिभा सम्मान समारोह 8 अप्रैल को

आबूरोड़ - अंबेडकर सेवा समिति व भीम सेना आबूरोड़ के संयुक्त तत्वाधान में प्रथम जिला स्तरीय भीम प्रज्ञा सम्मान समारोह व स्नेह मिलन कार्यक्रम 8 अप्रैल को प्रातः 1O बजे से विष्णु टॉकिज केसरगंज आबूरोड़ में आयोजित होगा ।
Bhim army
Bhim army @bhimvarta
माननीय भंवर मेघवंशी , माननीय प्रेमाराम देवासी, माननीय मोईनुदीन खान के आतिथ्य में SC,ST,OBC तथा अल्पसंख्यक प्रतिभाएं सम्मानित होगी
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