Kaala movie

काला.….

कल समय मिला तो 'काला ' फिल्म देखने का विचार आया
घोर आश्चर्य हुआ की एकाएक यह फिल्म सिर्फ एक हफ्ते में  दिल्ली के सिनेमाघरो से गायब कैसे हो गई? जबकि इस फ़िल्म की कमाई 100 करोड़ से अधिक है।

फिर इसके पटकथा का ध्यान आया जो मिडिया ने इसको रेटिंग दी है । मुख्य मिडिया के हिसाब से इसकी पटकथा दलित अस्मिता के हिसाब के लिखी गई है अतः रेटिंग 1.5 दी है।
Image@bahujantv

आप में से बहुतों ने फिल्म देख ली होगी , कहानी सबको पता ही होगी , रिव्यू या आलोचना पद्व ही ली होगी? किन्तु मैंने फिल्म अभी देखी है अतः इसपर लिखने से अपने आप को रोक नहीं पाया।

बहुत खोजने के बाद उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे लोनी बॉर्डर के पुराने और सिंगल पर्दे वाले सिनेमाघर में यह फिल्म लगी हुई मिली।

अब इस फिल्म की कहानी के पात्रों के नाम देखिये-

रजनीकांत का नाम काला है, काला रंग असुरों का होता है ऐसा ग्रँथ कहते हैं। फिल्म में काला शूद्र ही है। काला हमेशा काले कपड़े पहनता है।

काला के अधिकतर सीन में बैकग्राउंड में बुद्ध, अंबेडकर, लेनिन, मार्क्स की तस्वीरें दिखती है। बुद्ध विहार दिखता है।

नानापटेकर का नाम हरि अभ्यांकर है, हरि विष्णु का नाम है जो वैदिको के प्रमुख देवता है। हरि के आराध्य राम है, राम की मूर्ति उसके ऑफिस से लेके घर तक हर जगह  मिलती है।

हरि सफ़ेद कपडे पहनता है, काले रंग से उसे घृणा है। वह कहता है कि काला रंग गंदगी का होता है यंहा ध्यान देने की बात है कि ऋग्वेद में भी काले असुरों के प्रति घृणा है , उनके प्रति हिंसात्मक कार्यवाई है।

हरि की कंस्ट्रक्शन कंपनी का नाम 'मनु' है , मनु कौन थे और शूद्रो के प्रति क्या व्यवहार था यह सब जानते हैं।

काला के एक बेटे का नाम 'लेनिन' है, काला की प्रेमिका मुस्लिम है। काला ने एक देसी कुत्ता पाला हुआ है जिसका नाम भैरव होता है।

एक सीन पर लेनिन रोता है तो काला उसे डांटते हुए कहता है कि " रोता क्यों है? क्या इसी लिए मैंने तुझे एक क्रांतिकारी का नाम दिया था?"

हरि के बड़ा  नेता है, अपने पोस्टर पर लिखवाता है ' I am patriot , I will clean our country ' वह धारवी को 'डिजिटल ' बनाने का नारा देता है।

आप  मौजूदा एक बड़े नेता के कथन से इसे जोड़ के देखिये जो ' देशभक्त' होने का सर्टिफिकेट बांटता है, और 'स्वच्छ भारत ' नारा दे के चुनाव जीत गया है, वह ' डिजिटल भारत ' के नाम पर देश की अर्थव्यवस्था का क्या हाल कर दिया है यह आप जानते हैं।

काला के बेटे लेनिन की गर्लफ्रेंड जो की एक विरोधी और क्रांतिकारी प्रवृति की है , एक सीन में एक सेकेंड के लिए अपने छोटे से घर की लाइट जलाती है तो अम्बेडकर की तस्वीर दिखती है।

हरि अपने को राम समझता है और काला को रावण।

हरी  ' स्वच्छता अभियान ' की आड़ में अपनी ' मनु' कंपनी के जरिये धारवी जो की काला की बस्ती है, जंहा छोटी जाति /मुस्लिम आदि  गरीब लोग रहते है  जिन्होंने धारवी को अपनी मेहनत से खड़ा किया है, उस पर कब्ज़ा कर उसे तुड़वाके अमीरो के लिए बिल्डिंग्स और गोल्फ कोर्स बनवाना चाहता है।

वह धारवी के लोगो को उनकी जमीनों की एवज में छोटे छोटे कमरे देना चाहता है,काम धंधे के लिए अमीरो के घर नौकर बनने को कहता है।

धारवी प्रतीकात्मक रूप है भारत मूल लोगो की  जमीन का और मनु कंपनी प्रतीकात्मक रूप है उस पर कब्ज़ा करने वालो का और मूल लोगो को गुलाम बनाने का ।

काला एक सीन में अम्बेडकर का डायलॉग बोलता है' मैं अपने लोगो के अधिकारों के लिए स्वार्थी हूँ'

हरि पैर छूने की संस्कृति को उच्च मानता है जबकि काला हाथ मिलाने की। काला के अनुसार हाथ मिलाने से समानता की भावना आती है जबकि पैर छूने से दासता की।

हरि जब काला से हारने लगता है तो धारवी में 'हिन्दू मुस्लिम' दंगे करने की फ़िराक में रहता है, एक मस्जिद में सूअर का मॉस फिंकवा देता है। चुनाव जींतने के लिए हिन्दू मुस्लिम दंगे की ट्रिक किसकी है यह आप जानते हैं।

काला हरि के विरोध में धारवी के लोगो से अमीरों के घर काम बंद करने को कहता है ,और असहयोग आंदोलन चलवा देता है।

मिडिया उस आंदोलन की जम बुराई करती है यंहा तक की शान्ति पूर्ण आंदोलन को आतंकी आंदोलन बता देती है, यह सीन  मौजूदा मिडिया के रवैये को हूब हु दर्शाता है जो  दलितों के अधिकतर आंदोलन को आतंकी आंदोलन बता देती है। गोदी मिडिया जो काम करती है वैसी ही।

एक सीन बंद के दौरान लोगो को संबोधित करते हुए एक पुलिसवाला ' जय भीम'  के नारे लगा देता है।

काला एक डायलॉग बोलता है' अगर अपने अतीत की जड़े नहीं पहचानोगे तो भविष्य में खड़े कैसे रह पाओगे? "

हरि काला को मरवाने के लिए रामायण का पाठ अपने घर रखवाता है। काला मारा जाता है, किन्तु बस्ती के सभी लोग काला बन जाते हैं।

अंत में हरि के सफ़ेद कपड़ो पर पहले काला रंग गिरता है , फिर लाल और फिर नीला। ये तीनो रंग का अर्थ आप जानते हैं , काला दक्षिण का , लाल कम्युनिस्ट का और नीला अम्बेडकर का। हरि की सफ़ेद कमीज तीनो रंगों से सराबोर हो जाती है और वह मारा जाता है।

शूद्र/ दलित अस्मिता को लेके बनी ऐसी फिल्म मैंने आज तक बड़े पर्दे पर नहीं देखी , जंहा विरोध है शोषण के प्रति। जंहा खुल के बुद्ध है, अम्बेडकर हैं, लेनिन है, मार्क्स हैं ..... जय भीम है।

आश्चर्य है कि इस फिल्म पर बैन क्यों नहीं लगा अभी तक? शायद रजनीकांत और पा. रंजीथ फिल्म है इसलिए ऐसा नहीं हो पाया। किन्तु धूर्तता से इसे सिनेमाघरो से एक ही हफ्ते में उतार लिया गया।

सैल्यूट पा. रंजीथ , जो की स्वयं एक दलित है अतः ऐसी हिम्मत कर पाएं ।

फिल्म का हर दृश्य, बैकग्राउंड दृश्य, डायलॉग अपने आप में एक संदेश देता है, गूण रहस्य लिए हुए है, 'स्वच्छता अभियान' और 'डिजिटल इंडिया'' के नारे की आड़ में क्या होता है यह बखूबी दिखाया है।

यह फिल्म दो मुद्दों पर एक साथ प्रहार करती है, पहला ' स्वच्छ भारत' और ' डिजिटल इंडिया' की हकीकत तथा दूसरा भारत के मूल लोगो की जमीनों को कैसे हड़प के उन्हें गुलाम बनाया गया।

सभी कलाकरों के अभिनय जबरजस्त है, नानापटेकर ने  हरि अभ्यंकर के रोल में बहुत जानदार  ऐक्टिंग की है, रजनीकांत की तो खैर बात ही अलग है।

आप इस फिल्म को देखिये जरूर...मेरी तरफ से रेटिंग 4.5

साभार — संजय जी , Go Atheist व्हाट्सएप ग्रुप से 

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Jai bhim
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