मेघ गर्जना meghwal poem

मेघ बरसे मानव हर्षे  , हर्षे ऋषि मुनी ओर देव |
सन्त महात्मा सभी पुकारे , करो मेघ कि सेव ||

आँखें खोलो सुस्ती छोड़ो ,
 ताकत से बिगुल बजा रे |
जागो मेघवंशीयों जागो ,
सोए सिंह जगाओ रे ||
भाग्य हमारा खर्राटों मे अलगाओं कि चादर फेंको ,
अलसाई आँखों को मसलो एक सुनहरा सपना देखो |

  1. मेघ रिखिया मेहर बलाई मेघवाल वही नाम अनेकों |

कोस कोस नाम बदलता नामों पर मत  रोटी सेको ,
राष्ट्र पटल पर एक मंच पर एक नाम से आओ रे ||
हम बेटे हैं मेघ ऋषी के अंचल अंचल लेबल बदलो ,
आजदी को अरसां बीता थोड़ा थोड़ा अब तो संभलो |
लाल किले तक बढें कारवां अगंड़ाई हो इतना दम लो ,
हक हाशिल करना पड़ता है इक हुन्कार लगाओ रे ||
सृष्टि रची तब ब्रह्माजी को ताना बाना दिया वो हम ही थे ,
संत कबीरा रविदास और जोधल रामा पीर हम ही थे |
माया मेघ जीवणा दासी वीरभान सतनामी हम ही थे ,
गोकुल गरीबा घासी संत हमारे कहाँ नम थे ||
ओ तिरंगा बुननें वालों ,
तीन दिशा मत जाओ रे |
जागो मेघवंशीयों जागो ,
सोए सिंह जगाओ रे ||

This poem written by MASTER BHERARAM MEGHWAL

मास्टर भैराराम मेघवाल जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय अनुसूचित जाति समन्वय समिति बाडमेर और पूर्व राजस्थान प्रदेश प्रभारी राजपा दिल्ली तथा पूर्व निर्दलीय लोकसभा उम्मीदवार 2014 बाडमेर जैसलमेर

2 टिप्‍पणियां:

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Jai bhim
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